हिन्दु धर्म के सभी ग्रन्थों में प्रमाण है कि कबीर साहेब जी भगवान है आप सभी ने हिन्दू धर्म के सभी ग्रन्थों को पढा जरूर होगा अधिक जानकारी के देखे ईश्वर टीवी चैनल पर प्रतिदिन रात्रि 8:30बजे सतंसग पूर्ण संत रामपाल जी महाराज के द्वारा
परमेश्वर की खोज में आत्मा युगों से लगी है। जैसे प्यासे को जल की चाह होती है। जीवात्मा परमात्मा से बिछुड़ने के पश्चात् महा कष्ट झेल रही है। जो सुख पूर्ण ब्रह्म(सतपुरुष) के सतलोक(ऋतधाम) में था, वह सुख यहाँ काल(ब्रह्म) प्रभु के लोक में नहीं है। चाहे कोई करोड़पति है, चाहे पृथ्वीपति(सर्व पृथ्वी का राजा) है, चाहे सुरपति(स्वर्ग का राजा इन्द्र) है, चाहे श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु तथा श्री शिव त्रिलोकपति हैं। क्योंकि जन्म तथा मृत्यु तथा किये कर्म का भोग अवश्य ही प्राप्त होता है (प्रमाण गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5)। इसीलिए पवित्र श्रीमद् भगवद् गीता के ज्ञान दाता प्रभु(काल भगवान) ने अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि अर्जुन सर्व भाव से उस परमेश्वर की शरण में जा। उसकी कृपा से ही तू परम शांति को तथा सतलोक(शाश्वतम् स्थानम्) को प्राप्त होगा। उस परमेश्वर के तत्व ज्ञान व भक्ति मार्ग को मैं(गीता ज्ञान दाता) नहीं जानता। उस तत्व ज्ञान को तत्वदर्शी संतों के पास जा कर उनको दण्डवत प्रणाम कर तथा विनम्र भाव से प्रश्न कर, तब वे तत्वदृष्टा संत आपको परमेश्वर का तत्व ज्ञान बताएंग...
युगों से, अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोग कुछ देवताओं को सर्वोच्च मानते हैं और उन्हें विशिष्ट नामों से अभिवादन करते हैं। उस सर्वोच्च को सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी माना जाता है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई जैसे विभिन्न धर्मों के अनुयायी उस सर्वोच्च आत्मा को / उस ईश्वरीय शक्ति को ईश्वर / अल्लाह / रब / खुदा / भगवान कहते हैं, यह मानने के बावजूद कि एक सर्वोच्च शक्ति है जो 'सबका साथ एक' (ईश्वर है) एक)। अब, भक्तों के मन में यह सवाल उठता है: - वह सर्वोच्च देव कौन है? वह कौन है जो सर्वशक्तिमान है? कौन हैं श्री कृष्ण भगवान? आगे बढ़ते हुए, आइए जानें कि सर्वोच्च ईश्वर कौन है? पवित्र श्रीमद भगवद गीता के अनुसार? जिसका केंद्रीय चरित्र भगवान कृष्ण है। कौन हैं श्री कृष्ण भगवान? लोग हमेशा यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि भगवान कृष्ण कौन हैं या भगवान कृष्ण कौन थे, महाभारत, भगवद गीता और भगवद पुराण का सबसे व्यापक रूप से पूजनीय चरित्र भगवान श्री कृष्ण हैं, जो हिंदुओं के प्रमुख पूजनीय देवता हैं, जिन्हें आठवाँ अवतार माना जाता है भगवान विष्णु की। पवित्र भागवद उन्हें कई दृष्टिकोणों म...
सच्चे गुरु की पहचान भारतीय संस्कृति बहुत पुरातन है और इसमें गुरु बनाने की परंपरा भी बहुत पुरानी रही है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक गुरु अवश्य बनाता है ताकि गुरु उनके जीवन को नई सकारात्मक दिशा दिखा सके। जिस पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल व सुखमय बना सके एवं मोक्ष प्राप्त कर सके। गुरु की महत्ता को बताते हुए परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि कबीर, गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, पूछो वेद पुराण।। कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हों भी गुरु कीन्ह। तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन। भावार्थ :- कबीर परमेश्वर जी हमें बता रहे हैं कि बिना गुरु के हमें ज्ञान नहीं हो सकता है। गुरु के बिना किया गया नाम जाप, भक्ति व दान- धर्म सभी व्यर्थ है। ■ उपर्युक्त लिखी गई कुछ पंक्तियां एवं दोहों से हमें यह तो समझ में आ गया कि बिना गुरु के ज्ञान एवं मोक्ष संभव नहीं है। वर्तमान में व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि यदि वह गुरु धारण करना चाहे तो वह किसे गुरु बनाए? उसकी सामर्थ्य और शक्ति का मापदंड कैसे निर्धारित किया जाए । वर्तमान में बड़ी संख्या में गुरु विद्यमान हैं और अ...