Come know Jainism
#जैन_धर्म की जानकारी
#ऋषभदेव जी अयोध्या के राजा नाभिराज के पुत्र थे। धार्मिक विचारों के राजा थे। उनके कुल गुरु जो ऋषिजन थे, उनसे परमात्मा प्राप्ति का मार्ग जानना चाहा। उन्होंने ओम नाम तथा #हठयोग करके तप करने की विधि दृढ़ कर दी।
राजा ऋषभदेव को परमात्मा प्राप्ति करने तथा जन्म-मरण के दुखद चक्र से छूटने के लिए #वैराग्य धारण करने की ठानी। अपने पुत्रों को राज्य बांटकर घर त्याग कर जंगल में चले गये।
पहले 1 वर्ष तक #निराहार रहे। फिर 1000 वर्ष तक हठ योग तप किया। उसके पश्चात् धर्मदेशना (दीक्षा) देने लगे। पहली #धर्मदेशना अपने पोते मारीचि(भरत पुत्र) को दी फिर वही मारीचि वाला जीव आगे चलकर चौबीसवें तीर्थंकर #महावीर जैन बना।
ऋषभदेव जी प्रभु के वैराग में मस्त रहते थे। वे #निवस्त्र रहने लगे क्योंकि उनको अपनी स्थिति का ज्ञान नहीं था वह परमात्मा के वैराग्य में इतने मस्त थे कि उनको ध्यान नहीं था कि वह #नंगे है। उनका ध्यान परमात्मा में रहता था।
वर्तमान के जैनी महात्माओं ने वह नकल कर ली और नंगे रहने लगे। यह मात्र #परंपरा का निर्वाह है।
ऋषभ देव जी अपने मुख में #पत्थर का टुकड़ा लेकर नग्न अवस्था में कुटक के #जंगलों में
दिन-रात फिरते थे। एक बार बाँसों के आपस में घिसने से जंगल में #अग्नि लग गई। दावानल इतनी
भयंकर हुई कि सब जंगल जलकर राख हो गए। ऋषभ देव जी भी #जलकर मर गए।
ऋषभ देव जी का जीव ही बाबा #आदम के रूप में जन्मा जो मुसलमानों, ईसाईयों तथा
यहूदियों का प्रथम पुरूष तथा #नबी माना जाता है।
वर्तमान में #जैनी साधुओं के नंगे रहने की परम्परा मात्र है। इसका प्रभु प्राप्ति की #साधना से कोई मेल नहीं है।
न ही प्रभुदत्त शास्त्र गीता वेद तथा संतों की वाणियों में नंगे लेकर शरीर को कष्ट देकर परमात्मा प्राप्त करने की विधि बताई है। अर्थात् व्यर्थ है, शास्त्र विरुद्ध #मनमाना आचरण है।
इनमें #दिगंबर साधु बिल्कुल नंगे रहते हैं जो पूर्व के महापुरुषों की नकल कर रहे है।
जैन धर्म की स्त्री-पुरुष, लड़के-लड़कियां, बच्चे-वृद्ध सब उन नंगे साधुओं की #पूजा करते हैं। इनमें स्त्रियों को साधु नहीं बनाया जाता।
विचारणीय विषय है क्या #स्त्री को मोक्ष नहीं चाहिए। यदि उनका मार्ग सत्य है और #मोक्ष प्राप्त करने की यही विधि है तो स्त्रियों के साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाता ??
#सच्चाई को न मानकर मात्र परंपरा का निर्वाह करने से परमात्मा प्राप्ति नहीं होती।
परमात्मा प्राप्ति प्रभुदत्त शास्त्र #गीता_वेदों अनुसार भक्ति साधना करने से होगी।
स्पष्ट है कि यह शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण है यानि महावीर स्वामी द्वारा चलाए गये 363 #पाखंड मतों में से एक है। वर्तमान में जैन धर्म में 363 पाखंड मत वाली साधना चल रही है।
अधिक जानकारी के लिए देखिए
#तत्वज्ञान सत्संग--
साधना चैनल - 7:30pm.
ईश्वर टीवी - 8:30pm.